ग़ज़ल (दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने लगतें हैं)

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18 -Sep-2017 Madan Saxena Bewafai Poems 1 Comments  45 Views
ग़ज़ल (दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने लगतें हैं)

जब अपने चेहरे से नकाब हम हटाने लगतें हैं
अपने चेहरे को देखकर डर जाने लगते हैं

वह हर बात को मेरी

अनजानी मोहब्बत

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12 -Aug-2017 निशंक Bewafai Poems 0 Comments  114 Views
अनजानी मोहब्बत

नाराजगी नही परेशानी होती है
कभी कभी खामोशी मे भी
छिपी कोई कहानी होती है
हम जानते है वो न मेरा है

तू बेवफा

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03 -Aug-2017 Shaurya Rajput Bewafai Poems 0 Comments  103 Views
तू बेवफा

!..तू बेवफा..!

क्या लिखूं आज, तू ही बता दे,
मिल रहे नहीं लफ्ज़,
तो तू ही कुछ अलफ़ाज़ दे!
माना हो गया है

ये तो उसके फितरत की बात थी "रहस्य "

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10 -Jul-2017 रहस्य Bewafai Poems 0 Comments  165 Views
ये तो उसके फितरत की बात थी

ये तो उसके फितरत की बात थी "रहस्य "

चाहतें रहना उनको ये मेरी चाहत की बात थी ,
जफा करना ये तो उसके फि

किस गलतफहमी में जीता रहा

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03 -Jul-2017 रहस्य Bewafai Poems 0 Comments  139 Views
किस गलतफहमी में जीता रहा

किस गलतफहमी में जीता रहा "रहस्य "

जिसे वो अपनी किस्मत की लकीर समझता रहा ,
उसे नहीं पता की वो किस

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