Mera Bachpan

10
13 -Jan-2013 abhishek shukla Childhood Poems 1 Comments  12,438 Views
abhishek shukla

'' जब मैं छोटा बच्चा था ,
बस्ते में किताबें होती थी,
हम चलते चलते थकते थे ,
राहें कंकर की होती थीं .
टेढ़े मेढ़े रास्तों में,
हम अक्सर गिर जाते थे ,
सड़कों को पैर से मार मार कर, भैया दिल बहलाते थे ,
मैं तो रो पड़ता था हरदम,
आग उगलती गर्मी से,
भैया मुझको गोद उठता,
मम्मी जैसी नरमी से ,
जिन राहों से हम आते थे,
थे वह बंजारों के डेरे ,
जब हम उनको दिख जाते थे ; मोटी मोटी लाठी लेकर,
आस पास मंडराते थे,
तब जब पीछे से एकदम ,
भैया जब आ जाता था,
सबको मार मार कर ,
ताड़ी पार कर आता था ,
मुझको अब भी याद आती हैं, भूली बिसरी सारी बातें ,
जाने क्यों चुप चाप कही से , भर आती हैं मेरी आँखें ,
आज बदल गया है सब कुछ, सब कुछ फीका फीका है,
मतलब की दुनिया है यारों,
कोई नहीं किसी का है ,
अब भी पढ़ते हैं हम सब,
सब कुछ बदला बदला है,
कही धुप कही छावं है,
कुछ भी नहीं सुनहरा है,
सड़के पक्की हो गयी अब तो , पर उनमें है खाली पन,
मुझको अक्सर याद आता है, अपना प्यरा प्यारा बचपन ......''


Dedicated to
my big brother

Dedication Summary
my brother is my best friend, when i need him, he always with me, i love him very much.


Please Login to rate it.



How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

1 More responses

  • Diya Saini (Guest)
    Commented on 13-April-2016

    V.V Good lines.


You may also like

Is writing is your passion?

Then join us to spread your creativity to world. Registration is absolutely free.