Nanhi pari mere bagiya ki

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Nanhi pari mere bagiya ki

Nanhi pari meri bagiya ki
aaj dulahan bani hai
karke solah shringaar
saat phero ke saaton vachan
lekar sasural chali hai
Nanhi pari mere bagiya ki


kaise tum bin ab zindagi jiungi main
ghar ke kone kone me to
tu hi basi

Dangal

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Dangal

क्या लिखा है किस्मत में अपनी,
यह तो कोई कभी न जाना है,
बस हिम्मत को पूजती हैं सदियां,
हौसलों का ही

बेटी से माँ का सफर

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बेटी से माँ का सफर

एक बेटी से माँ का सफ़र, बेफिकरी से फिकर का सफ़र,
रोने से चुप कराने का सफ़र, उत्सुकत्ता से संयम का स

"मेरी बेटी"

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चहकती सी खिलती सी गुलाब की कलम है वो
मेरी बगिया को महकाती भीनी सी खुशबु है वो

जिस दिन उसने मेरे

प्यारी बेटी

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प्यारी बेटी

ख़ामोशी से तुमने मेरे जज़्बातों को जगा दिया
प्यारा सा शब्द बेटी ने मुझे
प्यार का अहसास करा दिया

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