Aadhunik Jeevan aur hum

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30 -Jul-2012 AMAR PRAKASH Environment Poems 0 Comments  2,620 Views
AMAR PRAKASH

साथियों, आज हम एक आधुनिक जगत में जी रहे हैं|
मगर, अपनी सदियों पुरानी, विरासत कहीं खो रहे हैं||

कहने को तो हम, विकासशील से, विकसित हो रहे हैं|
विडम्बना तो देखिये! कि पानी भी, खरीदकर पी रहे हैं||

आज की इस आपाधापी में, भविष्य की चिंता कहीं पर खो गयी है|
मात्र भौतिक सुख भोगने की अब, सभी की प्राथमिकता हो गयी है||

क्या, कभी हम सोचते हैं, आने वाली पीढ़ियों की?
वो दिन दूर नहीं जब, सांसें भी लेनी पड़ेंगी गिनतियों की||

हवा, पानी और मिट्टी सभी कुछ, तो प्रदूषित हो रहे हैं|
और हम कहते हैं कि, आधुनिक जगत में जी रहे हैं||

आधुनिकता यही होती है, तो फिर पिछड़ापन होता क्या है?
स्वच्छ और निरोगी जीवन के लिए हमने किया क्या है?

मानाकि आधुनिक होना, सभी का लक्ष्य होना चाहिए|
आधुनिकता किसे कहते हैं, यह भी तो समझना चाहिए||

इस धरा पर हरेक वस्तु का, निश्चित होता माध्यम है|
आज हमारे इस विकास का, पहिया जिस पर कायम है||

प्रकृति संतुलन को कायम रखना ही, हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए|
संसाधनों के दोहन के बराबर उनका, संवर्धन भी तो होना चाहिए||

वृक्षारोपण, वर्षाजल संचय और जैविक खादों पर ध्यानाकर्षण जरूरी है|
आधुनिकता के इस दौर में, प्रदूषण से निपटने की तैयारी अभी अधूरी है||

साथियों अगर आज हम, अपनी इस प्रकृति को संतुलित रख पायेंगे|
आने वाली पीदियों को एतिहासिक और उज्जवल भविष्य दे पायेंगे||

जिस दिन से हम सभी मिल, इन मुद्दों पर चिंतन करने लगेंगे|
सही मानों में तभी से हम, आधुनिक और अमर होने लगेंगे||


Dedicated to
My parents

Dedication Summary
Because, my parents are the one who inculcated seeds of poetry in me. They write on different subjects as their hobby not as a profession. I have also tried to get the joy of poetry through this poem on environmental issues. I hope that that, readers will like it.


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