ये चाची मासी क्यूं नहीं बन पाती ?

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01 -Jul-2017 Ashwani Kumar Family Poems 0 Comments  143 Views
ये चाची मासी क्यूं नहीं बन पाती ?

एक बात अक्सर, मेरे ज़हन में बेवजह है आती,
बच्चों की नज़र में ये चाची, मासी क्यू नहीं बन पाती ?

भले चा

नमन

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01 -May-2017 Neha Sonali Agrawal Family Poems 0 Comments  426 Views
नमन

मुट्ठी को बंद कर के,
और आँखें अपनी मूंद के,
अपने नन्हे कदमों से
आया मैं इस लोक में,
नये चेहरों से

घर परिवार

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25 -Apr-2017 युवा हिन्दी कवि Family Poems 0 Comments  346 Views
घर परिवार

आज के इस आधुनिक दौर में लोग अपनों के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं,घर परिवार टुटता जा रहा है। एक स

आंगन

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05 -Mar-2017 Mamta Rani Family Poems 0 Comments  605 Views
आंगन

पहले का वो आँगन,
लगता था कितना प्यारा।


सुबह शाम लगता था,
अपनों का जमावड़ा।

हँसी-ठिठोली होती थ

Parivar

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23 -Jan-2017 Parth Family Poems 0 Comments  1,614 Views
Parivar

अपनेपन की बगिया है
खुशहाली का द्वार,
जीवन भर की पूँजी है
एक सुखी परिवार ।

मां की ममता में बसता ह

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