जनाज़ा-एक उठावा (funeral-an arrival)

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01 -Aug-2016 Dilesh Jain Funeral Poems 0 Comments  186 Views
जनाज़ा-एक उठावा (funeral-an arrival)

मैं जब था तो किसी को मेरा एहसास ना था,
आज मैं जाने लगा तो सब रोने लगे,
पता नहीं सच्चे है या झूठे पर

सफर (घर से मरघट तक )

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03 -Jun-2016 Madan Saxena Funeral Poems 0 Comments  181 Views
सफर (घर से मरघट तक )

आँख से अब नहीं दिख रहा है जहाँ ,आज क्या हो रहा है मेरे संग यहाँ .
माँ का रोना नहीं अब मैं सुन पा रहा ,

Akhri safer

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21 -May-2016 Aajez Funeral Poems 0 Comments  184 Views
Akhri safer

tooti zanjeer sansoo ki qafes raha nahi qeyyam nahi parrao nahi manzel ka pata nahi saji majlesy matem gunja nikara gusha mekhana mien qafes parra hai zameen par jaan rah

Kisi greeb ka ghar bsaya jaye

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20 -Mar-2016 RK Funeral Poems 0 Comments  151 Views
Kisi greeb ka ghar bsaya jaye

मेरी मौत पर कोई आंसू न बहाया जाए,
ख़ुशी ख़ुशी मुझे इस दुनिया से रूकसत किया जाए।
वक्त होगा तो जला दे

Aakhiir kyon?

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09 -Aug-2015 Funeral Poems 0 Comments  212 Views
Aakhiir kyon?

था मैं नींद में और.
मुझे इतना
सजाया जा रहा था....
बड़े प्यार से
मुझे नहलाया जा रहा
था....
ना जाने
था

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