लगती हैं तू अपनी सी, या है भी....!

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लगती हैं तू अपनी सी, या है भी....!

लगती हैं तू अपनी सी, या है भी
तू ख्वाब मे है, या हकीकत मे भी
आवाज मे है, या फिर मेरे अल्फाज मे भी
नजर

ग़ज़ल (किस ज़माने की बात करते हो)

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ग़ज़ल (किस ज़माने की बात करते हो)

किस ज़माने की बात करते हो
रिश्तें निभाने की बात करते हो

अहसान ज़माने का है यार मुझ पर
क्यों राय भ

Kash jindagi kitab hoti

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26 -Sep-2016 priya karnani Life Poem 0 Comments  35 Views
Kash jindagi kitab hoti

Kash jindagi sachmuch kitab hoti, par sakti me ki age kya hoga.
Kya paungi me or kya dil khoega?
Kab thori khusi milegi kab dil royega?
Kash jindagi sachmuch kitab hoti, far sakti th me un lamho ko.
Jinhone mujhe rulaya th or mre apne ko mujse c

हौले-हौले पुरवायी बहने लगी है...

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हौले-हौले पुरवायी बहने लगी है...

हौले-हौले पुरवायी बहने लगी है,
जिन्दगी मेरे कानों मे कुछ कहने लगी है,
कभी था जो ख्वाहिशों का दौर,

Jeevan jine ki kala

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Jeevan jine ki kala

जीवन जीने की कला

विपरीत परिस्थतियों में ,
घोर परेशानियों में
टूटती ज़िन्दगी को ,
खुद में समेट

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