Maa Saraswati Vandana

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12 -Feb-2016 Rajesh Kumar Tiwari Basant Poem 0 Comments  596 Views
Rajesh Kumar Tiwari

अर्चना के पुष्प चरणों में समर्पित कर रहा हूँ ,
मन हृदय से स्वयं को हे मातु अर्पित कर रहा हूँ ,
मूढ़ हूँ मैं अति अकिंचन सोच को विस्तार दो ,
माफ़ कर मुझ पातकी को ज्ञान से तुम वार दो ,
लोभ स्वारथ दम्भ का अघ काट दो हे मातु तुम,
स्वच्छ निर्मल भाव की सौगात दो हे मातु तुम,
कर सकूँ आक्रमण तम पे कलम में वो धार दो ,
बस सकूँ बन प्रिय हृदय माँ शब्द का संसार दो ।
हो मेरा निर्मल चरित उज्जवल धवल तव वस्त्र सा ,
कर लेखनी को मातु वह आघात कर दे शस्त्र सा ,
तोड़ उर अंकुर तुरत माँ कलम के व्यापार का ,
पुत्र आकाँक्षी है माता बस तुम्हारे प्यार का ।
मैं स्वयं संग कुटुंब के तेरे गुण प्रवर्तित कर रहा हूँ ,
अर्चना के पुष्प चरणों में समर्पित कर रहा हूँ ,
मन हृदय से स्वयं को हे मातु अर्पित कर रहा हूँ ………………..।।

Maa Saraswati Vandana



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