खुशी

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खुशी

खुशी.।

कल राह यूँ हीं खुशी से,
मेरी मुलाकात हो गई.।

नाराज थी मुझसे मगर,
कुछ बात हो गई.।

फासला जो

इस संधि समय में

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01 -May-2017 Vikram Gathania Miscellaneous Poems 0 Comments  37 Views
इस संधि समय में

इस संधि समय में

इस संधि समय में
मैं खड़ा हूँ क्षितिजों से घिरा
देखता हूँ यह जंगल
करौंधे नये ह

अचिन्हित तट

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30 -Apr-2017 Purushottam Kumar Sinha Miscellaneous Poems 0 Comments  12 Views
अचिन्हित तट




कहते हुए कविता

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11 -Apr-2017 Vikram Gathania Miscellaneous Poems 0 Comments  41 Views
कहते हुए कविता

कहते हुए कविता

कहते हुए कविता
खुद का मजाक बनाते हैं
ये कवि लोग
बातें बना लेना भले ही आसान हो

तुम्हारा लिखा हुआ

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25 -Mar-2017 Vikram Gathania Miscellaneous Poems 0 Comments  57 Views
तुम्हारा लिखा हुआ

तुम्हारा लिखा हुआ

तुम्हारा लिखा हुआ यथार्थ नहीं
तुम नाहक ही बनाये हुए हो
जिंदगी को अपनी टाईम

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