तुम्हारा लिखा हुआ

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25 -Mar-2017 Vikram Gathania Miscellaneous Poems 0 Comments  18 Views
तुम्हारा लिखा हुआ

तुम्हारा लिखा हुआ

तुम्हारा लिखा हुआ यथार्थ नहीं
तुम नाहक ही बनाये हुए हो
जिंदगी को अपनी टाईम

अवशेष

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09 -Mar-2017 Purushottam Kumar Sinha Miscellaneous Poems 0 Comments  34 Views
अवशेष

अवशेष लिए अन्तःमन में बचा हूँ कुछ मैं शेष,
बीते से कुछ पल और मैं!
धुंधली सी तेरी झलक और यादों के अ

शब्द की इज्जत

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05 -Mar-2017 Vikram Gathania Miscellaneous Poems 0 Comments  52 Views
शब्द की इज्जत

शब्द की इज्जत

शब्द की इज्जत होती है
होनी भी चाहिए शब्द की इज्जत
कभी दाँव पर भी लग जाती है
शब्द

उत्कंठा का पंछी

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05 -Mar-2017 Purushottam Kumar Sinha Miscellaneous Poems 0 Comments  101 Views
उत्कंठा का पंछी

दिशाहीन सी बेतरतीब जीवन की आपाधापी में,
तड़प उठता मन की उत्कंठा का ये पंछी,
कल्पना के पंख पसारे क

KORA KAAGAZ

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24 -Feb-2017 indra jain Miscellaneous Poems 0 Comments  34 Views
KORA KAAGAZ

रोज सुबह उठती हूँ
हाथ में कोरा कागज़ लिए।
सोचती हूँ ..........
आज लिखूंगी इस

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