कुछ भी अब पहले सा कहाँ है..

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17 -Sep-2017 Thakur Gourav Singh Miscellaneous Poems 7 Comments  139 Views
कुछ भी अब पहले सा कहाँ है..

हैरान हूँ मैं कि सब बदल गया है
कुछ भी अब पहले सा कहाँ है
ज़िंदगी की इस दौड़ में अब वक्त कहाँ है…

मैं और तुम

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14 -Sep-2017 Adityaraj Miscellaneous Poems 0 Comments  58 Views
मैं और तुम

मैं भारत का वासी हूं,
और भारत मेरी मां है।
तू भी इसका बेटा !!!
फिर क्यों न कहता 'मा

ख़ामोशी का नाद

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14 -Sep-2017 indra jain Miscellaneous Poems 0 Comments  25 Views
ख़ामोशी का नाद

" ख़ामोशी की भाषा "
"हर ख़ामोशी कुछ कहती है "

मैंने अक़्सर
ख़ामोशी का नाद सुना है।

नये रास्ते

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09 -Sep-2017 Vikram Gathania Miscellaneous Poems 0 Comments  58 Views
नये रास्ते

नए रास्ते

अपने आपको दोहराता हूँ मैं
रोज़ रोज़
चलता हूँ एक ही रास्ता
कभीकभी
घूम आता हूँ
पुरा

PATANG

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08 -Sep-2017 RAMESH BISHT Miscellaneous Poems 0 Comments  39 Views
PATANG

PATANG

Patang sa Udta chala Mera Mann
Rishton Ke Maaanjhon Mei Uljha Mera Mann

Mann Patang Ki Dor sa Manzilen Dhundta
Kabhi Khwasiyen to Kabhi Apni Kami ko Dhundta

Mannn Ladta bhi hain Girta Bhi Hai
Smbhalta Bhi hai Patang Sa

Haal

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