Rewari Baant Rahi Sarkar

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Rewari Baant Rahi Sarkar

आयोजन के नाम पर, धन जो रहे डकार।
उनको ही अब रेबड़ी, बाँट रही सरकार।।

कदम-कदम पर दे रहे, धोखा बनकर

Siyasi Gulami

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Siyasi Gulami

सियासी गुलामी
भ्रष्टाचारों की आवाजें जब संसद में उठती है
मां,बहनो की इज्जत चौराहों में ख

हमारा सरकारी तंत्र

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हमारा सरकारी तंत्र

हमारा सरकारी तंत्र
लाख कोशिस कर ले कोई
या कर ले तंत्र -मंत्र
ना सुधरेंगे नेता जी
ना सुधरेगा सरक

Maal Uda Mallya

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Maal Uda Mallya

माल उड़ा माल्या उड़े , सात समंदर पार ।
निकला साँप लकीर को,पीट रही सरकार ।।

कितने माल्या हैं पड़े , कर

मुल्क के हुक्मरां

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11 -Mar-2016 Anwar Politics Poem 0 Comments  176 Views
मुल्क के हुक्मरां

आज तो मुमकिन नहीं कि ये दास्तान पूरी करूं ,
वक्त-ए-ज़रूरी हिदायात का फिर भी बताना है ज़रूरी

बाग-ए-

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