Rituraaj Basant

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12 -Feb-2016 Dr. A.D. Khatri Basant Poem 0 Comments  533 Views
Dr. A.D. Khatri

ऋतुओं का राजा बसंत, है सेना लेकर आया,
चतुरंगी सेना१ का यौवन, मौसम पर है छाया.
हाथी जैसा मन चलता, मंथर गति है मतवाली,
प्रेम के सागर में डूबा, फड़के होंठों की लाली.
किस-किस को मैं प्यार करूं,किस पर प्रेम लुटाऊँ,
प्रेम की दुनिया मुझे बसानी, किस पर वारी जाऊं.
भावों में मन मस्त हुआ, प्यार का ध्वज लहराया,
ऋतुओं का राजा बसंत, है सेना लेकर आया,
चतुरंगी सेना का यौवन, मौसम पर है छाया.
घोड़े जैसी दिल की धड़कन, मचल-मचल है चलता,
कभी उछलता आसमान में, हवा से बातें करता.
रक्त प्रेम का नस-नस दौड़े, यौवन ले अंगड़ाई,
आज मुझे कोई न रोके, मधुर बहारें छाईं.
मौसम भी है आज फड़कता, उसने यौवन पाया,
ऋतुओं का राजा बसंत, है सेना लेकर आया,
चतुरंगी सेना का यौवन,मौसम पर है छाया.
रथ पर बैठ रथी ने अपने, छेड़े मधुर तराने,
सोते दिल भी उठकर बैठे, सभी हुए दीवाने.
कृष्ण की बंसी जैसी धुन, वे बारम्बार बजाएं ,
चंचल मन बेहाल हुए, मदहोश हो नाचे-गाएं.
आए प्रेम की दुनिया से, प्यार का रस बरसाया,
ऋतुओं का राजा बसंत, है सेना लेकर आया,
चतुरंगी सेना का यौवन, मौसम पर है छाया.
सैनिक आगे-आगे चलते, प्रेम की पौध उगाएं,
हर पौधे पर बड़े जतन से, प्रेम के पुष्प लगाएं.
कदम थिरकते, कमर मटकती, तितली जैसे डोलें,
प्रेम की धुन पर आगे बढ़ते, गीत प्रेम के बोलें.
मौसम पर कब्जा कर उसने, प्रेम का जाल बिछाया,
ऋतुओं का राजा बसंत, है सेना लेकर आया,
चतुरंगी सेना का यौवन, मौसम पर है छाया.
नर-नारी, पशु, कीट-पतंगे, सभी हुए हैं घायल,
प्रेम से डर जो दुबक गए थे, सभी हो गए पागल,
अधीन हुए ऋतु राजा के सब, प्रेम की भिक्षा मांगें,
जो थे सदा-सदा से पीड़ित, भाग्य सभी के जागे,
ऋतुराजा ने आनंद सुधा रस, सबको खूब पिलाया,
ऋतुओं का राजा बसंत, है सेना लेकर आया,
चतुरंगी सेना का यौवन, मौसम पर है छाया.
१.चतुरंगी सेना : हाथी, घोड़े, रथ, और पैदल.



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