समय से कौन जीता है समय ने खेल खेले हैं

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समय से कौन जीता है समय ने खेल खेले हैं

ग़ज़ल( समय से कौन जीता है समय ने खेल खेले हैं)

अपनी जिंदगी गुजारी है ख्बाबों के ही सायें में
ख्ब

मेरा आने वाला कल आज ना हो……

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मेरा आने वाला कल आज ना हो……

मुझे पता ना था की
मेरा आज कल सा होगा
जैसे कल रोया था
वैसे आज भी रोना होगा
जो सपने थे कल टूटे
वो आज

गज़ल (समय ये आ गया कैसा )

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गज़ल (समय ये आ गया कैसा )

गज़ल (समय ये आ गया कैसा )

दीवारें ही दीवारें , नहीं दीखते अब घर यारों
बड़े शहरों के हालात कैसे आज बद

Vyarth Na Samay Ganwaao

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Vyarth Na Samay Ganwaao

व्यर्थ न समय गवाँइए, इससे मुँह मत फेर।
मिट्टी को कंचन करे, नहीं लगाता देर।।

समय पड़े पर गधे को, ब

वक़्त की फिर कमी है ……

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वक़्त की फिर कमी है ……

वक़्त की फिर कमी है ……
तेरा साथ निभाने को ,
वक़्त की फिर कमी है ……..
तेरे साथ में गाने को ,
वक़्त बेरहम

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