गज़ल (समय ये आ गया कैसा )

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गज़ल (समय ये आ गया कैसा )

गज़ल (समय ये आ गया कैसा )

दीवारें ही दीवारें , नहीं दीखते अब घर यारों
बड़े शहरों के हालात कैसे आज बद

Vyarth Na Samay Ganwaao

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Vyarth Na Samay Ganwaao

व्यर्थ न समय गवाँइए, इससे मुँह मत फेर।
मिट्टी को कंचन करे, नहीं लगाता देर।।

समय पड़े पर गधे को, ब

वक़्त की फिर कमी है ……

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वक़्त की फिर कमी है ……

वक़्त की फिर कमी है ……
तेरा साथ निभाने को ,
वक़्त की फिर कमी है ……..
तेरे साथ में गाने को ,
वक़्त बेरहम

वक्त बक्त की बात (मेरे नौ शेर )

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वक्त बक्त की बात  (मेरे नौ शेर )

(एक )


अपने थे , वक़्त भी था , वक़्त वह और था यारों
वक़्त पर भी नहीं अपने बस मजबूरी का रेला है


(दो )


वक़्त की रफ़्तार

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वक़्त की रफ़्तार

समय की सुई इतनी तेज़ी से फिसल रही है
मानों बर्फ़ की चटटान होले से पिघल रही है
की करने है अभी बहुत से

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