वक्त बक्त की बात (मेरे नौ शेर )

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वक्त बक्त की बात  (मेरे नौ शेर )

(एक )


अपने थे , वक़्त भी था , वक़्त वह और था यारों
वक़्त पर भी नहीं अपने बस मजबूरी का रेला है


(दो )


वक़्त की रफ़्तार

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वक़्त की रफ़्तार

समय की सुई इतनी तेज़ी से फिसल रही है
मानों बर्फ़ की चटटान होले से पिघल रही है
की करने है अभी बहुत से

The Value Of Time,

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The Value Of Time,

Samay-2 par kaam karo,
Nitya(Prata) uth vyayam karo,

samay karata sabko pahchaan,
Samay banaata sabko vidvan,

Samay ko na vyrth gavaao,
Padh likhakar tum naam kamaao,

subah samay hai kaam ka,
ratri samay vishram ka,

T.V. Me na dhyan l

ग़ज़ल ( दर्द से मेरे रिश्ते पुराने लगतें हैं)

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ग़ज़ल ( दर्द से मेरे रिश्ते पुराने लगतें हैं)

वह हर बात को मेरी क्यों दबाने लगते हैं
जब हकीकत हम उनको समझाने लगते हैं

जिस गलती पर हमको वह समझा

ग़ज़ल (बक्त कब किसका हुआ)

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ग़ज़ल (बक्त कब  किसका हुआ)

ग़ज़ल (बक्त कब किसका हुआ)

बक्त कब किसका हुआ जो अब मेरा होगा
बुरे बक्त को जानकर सब्र किया मैनें

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