Patjhad

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Patjhad

Is baar k patjhad ne
Yun hi Chhor dya
Bikhra hua

Jivit hu
Chahti hu apni mayoosi
Kitabon me smet lu
Nhi h jinko shikayat
Koi rehnummai
kutre hue pankho k lye
Sb tamashabino ki toli
De gyi rooh ko dua
Shayad bcha ni kuch
Yun khelne me

Naari

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10 -Jan-2017 Namrata Shripad Woman Poems 0 Comments  39 Views
Naari

जिस समाज में होती है बात नारी उत्थान की,
वही कही जलती है, चिता उसके सम्मान की।।
कन्या पढ़े कन्या ब

गृहणी के जीवन में इतवार नहीं

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04 -Dec-2016 Vikash Khemka Woman Poems 0 Comments  96 Views
गृहणी के जीवन में इतवार नहीं

कोई छुट्टी नहीं कोई छुट्टी का इंतजार नहीं,
कभी चैन नहीं कभी करार नहीं,
हर त्यौहारों में देखा है,

एक मुट्ठी आजादी

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एक मुट्ठी आजादी

आज फिर खड़ी हूँ दरवाजे पर एक बेजान मूरत सी
अपने अस्तित्व को तलाशती
अपनी उम्मीद और किसी का साथ तल

महिला सशक्त रंग

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महिला सशक्त रंग

महिला सशक्त रंग

होली तो प्रतीक है,
त्रिकोणीय प्रहलाद-हिरणाकश्यप,
होलिका दन्त कथा की ,
होली तो

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