Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

INDEPENDENCE DAY (India)

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24 -Jun-2013 Praveen Rawat 15 August Poem 2 Comments  2,600 Views
Praveen Rawat

लाल रक्त से धरा नहाई,

श्वेत नभ पर लालिमा छायी ,

आजादी के नव उद्घोष पे ,

सबने वीरो की गाथा गायी ,

गाँधी ,नेहरु ,पटेल , सुभाष की ,

ध्वनि चारो और है छायी ,

भगत , राजगुरु और , सुखदेव की

क़ुरबानी से आँखे भर आई ||

ऐ भारत माता तुझसे अनोखी ,

और अद्भुत माँ न हमने पायी ,

हमारे रगों में तेरे क़र्ज़ की ,

एक एक बूँद समायी .

माथे पर है बांधे कफ़न ,

और तेरी रक्षा की कसम है खायी ,

सरहद पे खड़े रहकर ,

आजादी की रीत निभाई ,||


आजादी

ये कैसी आज़ादी है ,

हर तरफ बर्बादी है ,

कही दंगे तो कही फसाद है ,

कही जात पात तो कही ,

छुवा छूत की बीमारी है |

हर जगह नफरत ही नफरत ,

तो कही दहशत के अंगारे है

क्या नेता क्या वर्दी वाले ,

सभी इसके भागीदारी है .



हम तो आज़ाद हुए लड़कर पर ,

आज़ादी के बाद भी लड़ रहे है ,

पहले अंग्रेजो से लड़े थे

अब अपनों से लड़ रहे है ,

आज़ादी से पहले कितने ,

ख्वाब आँखों में संजो रखे थे ,

अब आजादी के बाद वो ,

ख्वाब ,ख्वाब ही रह गए है ,

अब तो अंग्रेज़ी राज और ,

इस राज में फर्क न लगे ,

पहले की वह बद स्थिति

अब बदतर हो गई है ..||


ये कविता हर देशवासियों तथा मुख्य रूप से उन्हें समर्पित है जिन्होंने 26/11 को हुए आतंकी हमले को सेहन किया | ये कविता हर उस शहीद के लिए है जिसने आतंकियों का डट कर मुकाबला किया

और होंगे धमाके ,और फटेंगे बम .

पर हमारे अन्दर का जोश कभी न होगा कम

हर मुस्किल परिस्थिति में ,एक रहेंगे हम ,

पुरे विश्व में कायर नहीं ,वीर कहलायेंगे हम ,

जी तोड़ महनत कर लो ,पर कभी न डरेंगे हम ,

दामिनी सा गर्जायेंगे किसी भी मौसम में हम ,

ये धरा हमारी माता है ,इसके लाल हम ,

इस पर वार करने वाला हर निशाचर होगा ध्वं .

देवो की इस धरती पे , एक न बचेगा दशानन ,

खडग उठाये हम खड़े ,आतंकियों का होगा अंत

ऐ शहीदों तुम्हारे बलिदानों को

याद रखेंगे हम ,

तुम्हारी ही तरह इस देश के , वीर कहलायेंगे हम||


रात के अंधियारे में ,

जब तक रुतबा रहेगा चाँद का ,

कारगिल की चोटियों पर ,

तब तक फैरता रहेगा तिरंगा शान का .

धरती क्या आसमान में ,

डंका बजेगा हिंदुस्तान नाम का ….



2.गली गली में तूफ़ान है ,

आबो हवा में खुसबू है एक पहचान की ,

जब तक सांस रहेगी मुझमे ,

तब तक रक्षा करूँगा हिंदुस्तान की ..



3.हार के बाद जीत ,

खेल का अगला चरम है ,

सदा फैरता रहे छोटी पे

तिरंगा यही हमारा प्रण है ,

न हिन्दू न मुसलमान ,

इंसानियत ही सबसे बड़ा कर्म है ,

अरे यारो का मुल्क से भी बड़ा ,

कोई धर्म है …..



Dedicated to
country people

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2 More responses

  • poemocean logo
    Mukul tyagi (Guest)
    Commented on 28-May-2015

    nyc poem....

  • poemocean logo
    Ravinder (Guest)
    Commented on 17-July-2013

    bharat mata ki jay.....................

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