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Zinda Hai Jubaan

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29 -Apr-2014 KALYAN SINGH CHOUHAN 15 August Poem 0 Comments  4,880 Views
KALYAN SINGH CHOUHAN

---जिन्दा है जुबान---

उठो जागो सवेरा हुआ है
ये वतन अब तेरा हुआ है
एक देश भक्त्त का सिर कटा है
पूरे देश मे बखेरा हुआ है
यू जाने से किसी का क्या बिगड़ा
देश वाशियो के घर अँधेरा हुआ है
तूने केवल एक माँ नही
भारत माँ के दिल को छुआ है
मै मानता हुँ आज की राजनीति एक काला कुँआ है
बिना धड़ का शरीर हिंदुस्तान मे सिर पाकिस्तान मे
यह मेरे देश मे कैसा अँधेरा हुआ है
अ माँ तू ही कितनी भाग्यवान
तेरे यहाँ ऐसा सपूत हुआ है
जो देश भक्ति का सबूत हुआ है
घड़ी शुभ महूरत की थी कि
तेरे बेटे का सीमा पे प्राणो से फेरां हुआ है
हाँ, एक माँ के दिल मे छेद, पडोसी देश से मतभेद हुआ है
यह कटा सिर कोई खामोश नही-बदले के लिये दोड़ा हुआ है
जिन्दा है जुबान कटे सिर की ओर सन्देश देती है साथियो
दुश्मन को कही अब सोने न दो तुम
अब सपूत देश के कभी खोने न दो तुम
छोड़ो दो रास्ता अब ये शराफत का
ध्यान रखलो जरा इस शहादत का
ओर किसी माँ को अब रोने दो तुम
देश अपमान अब कही होने न दो तुम
अब देश अपमान कही होने न दो तुम
हवा क्रान्ति की आई है क्योकि
दरख्तों पे चिड़ियों का फ़ेरा हुआ है
यह मेरी पंक्तिया है
कि किसी ओर का हक भी नही
आज इस आजाद भारत मे
अ सपूत-अ कटे सिर ये वतन तैरा हीं हुआ है
ये वतन तैरा हीं हुआ है
उठो जागो सवेरा हुआ है
ये वतन अब तेरा हुआ है
एक देश भक्त्त का सिर कटा है
पूरे देश मे बखेरा हुआ है

kavikalyanraj@yahoo.in
Kalyan Singh Chouhan



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