Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

गाँधी जी

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02 -Oct-2016 Dr. Swati Gupta 2 October Poems 0 Comments  3,132 Views
गाँधी जी

नाम तुम्हारा गाँधी था, पर हम सबके बापू कहलाये, तुम थे सच्चे और थे प्यारे, शांति की हमे राह दिखाये, दिखने में दुबले पतले थे, लेकिन पूरे भारत की ताकत थे, सत्य और अहिंसा जैसे, दो अस्त्र थे इनके प्यारे, जिनके बल पर गांधीज

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी

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01 -Oct-2016 Mamta Rani 2 October Poems 0 Comments  3,227 Views
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी

राष्ट्रपिता जो कहे जाते है, प्यार से बापू , उन्हें बुलाते हैं। जिन्होंने देश को, आज़ाद कराया। सत्य अहिंसा का, पाठ पढ़ाया। महात्मा गांधी वो कहलाते हैं। उन्होंने विलास को छोड़कर, अपना जीवन देश की, आज़ादी में लगाया।

Gandhi Maraa Nahi Karte Hain

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31 -Jan-2016 Dr. Pradeep Shukla 2 October Poems 0 Comments  2,634 Views
Gandhi Maraa Nahi Karte Hain

बच्चों एक थे मोहनदास भारत के वह सबसे ख़ास पैदा हुए काठियावाड़ रास न आते उन्हें जुगाड़ नक़ल कभी वह कर ना पाए हरदम थर्ड डिवीज़न आये चले गए बैरिस्टर बनने लौटे धोती कुर्ता पहने कुछ दिन बाद गए अफ्रीका लेकिन वहाँ रंग था फ़ीक

Gandhi ji ke janmdivas par.....

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25 -Dec-2015 Mahi 2 October Poems 0 Comments  2,139 Views
Gandhi ji ke janmdivas par.....

Gandhi ji ke janmdivas par sabko sabak shikhana hai, Jhuthe kapati logo ko is dharti se bhagana hai..... Ager ho gaye ho pure kaam, Phir bhi lena Gandhi ka naam, Dushmano ko kah do jaake, Aa rahe hai gandhi bhage, Lega har koi gandhi kaa naam, Maar girayega ye toofan, Aayegi jab vaapas baari, Gandhi ji honge avataari, Le ke 1947 ka naam, Yaad dilayenge vo paigaam, Gandhi ji ke................... Kah do Dushmano se jaake, Aa raha hai Bharat bhage, Ho jana taiyaar tum bhi, Hum kab se taiyaar hai, Aayega aisa toofan, Mita dega sara Pakistan, Soche

Kalyug Ke Murge

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08 -Dec-2015 Prabhudayal Shrivastava 2 October Poems 0 Comments  2,065 Views
Kalyug Ke Murge

रोज चार पर मुर्गों की अब, नींद नहीं खुल पाती बापू| इस कारण से ही तो अब वे, गाते नहीं प्रभाती बापू| कुछ सालों पहिले तो मुर्गे, सुबह बाँग हर दिन देते थे| उठो उठो हो गया सबेरा, संदेशा सबको देते थे| किंतु बात अब यह मुर्गों क

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