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30 रू की कसम

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22 -Sep-2017 अभिषेक आर्य Break Up Poems 1 Comments  626 Views
अभिषेक आर्य

मुझे 30 रू की कसम है
की तुम अब मुझमें नहीं।
ना तुम ख्वावो में ,
ना तुम ख्यालो में ,
ना तुम कल्पनाओं में ,
ना ज़ज्बातो में ।
ना ही तुम्हारे शब्द याद हैं मुझे ,
ना ही तुम्हारी हॅसी ,
लरज़ते होठ, लटकते बाल
सब भुला चुका हूॅ मैं ।
मुझे 30 रू की क़सम है ।
की तुम हो नही अब गीत में,
ना तुम संगीत में ।
ना तुम वेवज़ह
याद करने की रीत में ।
ना दीलो के खेल में ,
ना उनके हार - जीत में ।
मुझे 30 रू की क़सम है ।
की इस वक्त भी मै
तुम्हे याद नही कर रहा ।
तुम ठीक तो हो ना ...
अब नही पूछना मुझे खुद से बार -बार ।
हृदय पे अंकित नाम तुम्हारा ,
तो मिट गया था पिछली बरसात में ।
और इधर
ऑखो की बॅुदो ने भी अलग कर दीया था हमदोनो को ।
मुझे 30 रू की क़सम है ।
की अब ना हो तुम हमारे किस्सों मे ।
ना कहानियों में ,
ना दोस्तों की छेड़खानीयों में ।
ना हीं तुम्हारा नाम लेकर चिढ़ाते लोग,
ना ही तुम्हारी क़समे देते ।
ना हो तुम अब खुशी मे, ग़म मे ।
ना दुखो मे , ना परेशानियों में ।
तुम कैसी हो , क्यों हो , कौन हो ?
इन प्रश्नो से निकल चुका हूॅ मैं ।
मुझे 30 रू की क़सम है ।
की ये जब तक मेरे साथ है,
ना तुम हो ,
ना तुम्हारी शिकायते ।
ना तुम हो ,
ना तुम्हारी बदमाशियॉ ।।
ना तुम्हारा गुस्से मुॅह फुलाना ।
ना तुम्हारा हर बात पे टोकना ।
ना ये बताना की ....
टाई उल्टी है सिधी कर लो।
क्योंकि अब ये 30 रू मेरे साथ हैं।
जो एहसास दिला रहे हैं ,
अपने होने का ।
जो मै कभी तुझमें ढूंढता था ।
आज इसने अपनी आग़ोश मे इस क़दर भर लिया है ,
जैसे मैं लेटा हूॅ खुशियों के सेज़ पर ।
और पैर दबा रही है सारे गम ,
दासी बनकर।
ये एहसास मुझे बड़ा सुकुन दे रहा है ....
मुझे 30 रू की क़सम है ।
अभिषेक आर्या



Dedicated to
my love

Dedication Summary
she is no more now

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1 More responses

  • p.m.
    P.m. (Registered Member)
    Commented on 30-April-2019

    Badhiya...every reader wants d secret of 30rs...great job.keep it up.

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