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आज एहसास हुआ ये

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04 -Nov-2015 musafir Sad Poems 0 Comments  1,797 Views
आज एहसास हुआ ये

आज एहसास हुआ ये, एक अरसा बित जाने के बाद
लोग भूल जाते है, तुम्हे जरूरत खत्म हो जाने के बाद

गिरे हुए को देख, हाथ बढ़ाने की गलती ना करना
वो खुद तुम्हे गिरा देगा, उठ जाने के बाद
किसी कि खरोंचे देख, मैं भी मरहम बनने चला था
उसने हीं खंजर घौंपा, घाँव भर जाने के बाद

खुदगर्जी से भरी है, ये सारी दुनिया ही
पेड़ भी गिरा देते है, पत्तों को, पानी सुख जाने के बाद
जब तक खुशबु है, मँडरायेगी वो
तितली भी नहीं बैठती फूलों पे, मुरझाने के बाद

वहम था मेरा कि, शेर को पसंद है शिकार करना
कभी देखा है उसे शिकार पे, पेट भर जाने के बाद
शौक से पहना है आज, जो खुबसूरत ऊन तुमने
कल खुद बक्से मे रख दोगे उसे, सर्दी खत्म हो जाने के बाद

बुरे वक्त मे तो हर कोई, साथ चाहेगा तुम्हारा
कभी उसे आज़मा के देखना, हालात सुधर जाने के बाद

चीजों का इस्तेमाल करते, तो सबको देखा था
अजीब लगा जब, किसी को इंसानो का इस्तेमाल करते देखा
सोचा खबरदार कर दूँ, तुम सबको भी
वरना पछताते तुम भी, इस्तेमाल हो जाने के बाद!!!!

Poem by:- Shikari Yashwant



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