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आज फिर नवोदय मे जाने को मन करता है by Pankaj Chourey Navodayan!!!

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26 -Feb-2020 देवम सेंगर Friendship Poems 0 Comments  426 Views
आज फिर नवोदय मे जाने को मन करता है by Pankaj Chourey Navodayan!!!

कुछ खुदा से अधूरी फरियादे,
कुछ यारो से मिलने के वादे,
खो गया है वक़्त मे सबकुछ ना जाने कहाँ,
आज खोज लाने को मन करता है,
जिंदगी का जो अमिट हिस्सा है,
उसी नवोदय मे जाने को मन करता है,

कभी सुबह पी.टी.से शुरुआत,
कभी हसीं का समंदर तो कभी टूटे जज़्बात,
कभी क्लासरूम मे बेवक्त सो जाना,
emotion भरा वो गीत गुनगुनाने को मन करता है,
आज फिर उसी नवोदय मे जाने को मन करता है,

वो अतीत मेरा या एक सुहाना सपना था,
धुंधला सा है, यादों मे वो जो कभी अपना था,
कुछ यारो की बाकी थी बाते,
आज उन्ही मोहब्बत की महफ़िलों मे खो जाने को मन करता है,
आज फिर उसी नवोदय मे जाने को मन करता है,

कभी चोकीदार से छुपकर आना,
तो कभी रातो को खाना बनाना,
वो टीचरो की डांट पर न सुधरना,
फिर यारो संग बैठकर बातों के किले बनाना,
आज उन्ही किले की दीवारों पर चढ़ जाने को मन करता है,
आज फिर उसी नवोदय मे जाने को मन करता है,
आज फिर उसी नवोदय मे जाने को मन करता है,
आज फिर उसी नवोदय मे जाने को मन करता है।

आज फिर नवोदय मे जाने को मन करता है by Pankaj Chourey Navodayan!!!


Dedicated to
नवोदय के मित्र

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