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आतंकवाद और पाकिस्तान

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26 -Feb-2019 mannu bhai Terrorism poems 0 Comments  555 Views
mannu bhai

*आतंकवाद और पाकिस्तान*

आज कलम की स्याही सूख गई, आत्मा मेरी दुख गई
रफ्तार भी कुछ रुक गई, पर ना सोचना आंख झुक गई

जो कांड हुआ है धोके से, जवाब भी तो मिलेगा चौके से
हम चाल चलेंगे मोके से, जो ना रुकेगी किसी के रोके से

हर भारतवासी का नारा है, जिन्हें देश जान से भी प्यारा है
गवाह जिसका जग सारा है, तूने सोते शेर को ललकारा है

चल के ना *पाक* दांव को, खरोच दिया है पुराने घाव को
अब मान के मेरे सुझाव को, तू पकड़ ले हमारे पांव को


तेरा न कोई धर्म है न जात है, और ना ही मजहब की बात है
मुझे केवल इतना ज्ञात है, राम और रहीम दोनों मेरे साथ है


सुन ले पाकिस्तान ध्यान से, जो देश बना है खुद दान से
जहां आतंकवादी घूमे सान से, उन्हें खींच निकालेंगे खान से

तू पड़ा है जिनके पैर पर, अब उनकी सलामती की खैर कर
जब भी शेर निकलेगा सैर पर, लौटेगा कुत्तो को ढेर कर

सायद तुझे ध्यान होगा, काश्मीर सदा भारत की सान होगा
सलामत हिंदुस्तान होगा, पर तेरा मुल्क कब्रस्तान होगा


मनोज कुमार पुरोहित
अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल)



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