Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Aaya Jada

0
06 -Dec-2016 Indresh Bhadauria Winter Season Poem 0 Comments  1,346 Views
Indresh Bhadauria

****** आया जाड़ा ******

आया जाड़ा, आया जाड़ा।
दाँत पढ़ रहे अजब पहाड़ा।

सभी जगह जल रहे अलाव।
नहीं देखते आव व ताव।
थर,थर,थर, थर काँप रहे हैं।
बैठ के सब जन ताप रहे हैं।
परेशान करता अति जाड़ा।
दाँत पढ़ रहे अजब पहाड़ा।

गरम - अँगीठी, हीटर सारे।
ठण्ढ हटाते शाम - सकारे।
पीकर गरम चाय का प्याला।
गुदड़ी ओढ़ के बैठे लाला।
बूढों को खलता है जाड़ा।
दाँत पढ़ रहे अजब पहाड़ा।

सायंकाल विस्तर के अन्दर।
घुस जाते हैं मियाँ मुछन्दर।
सब जाड़े से हैं घबराते।
स्वेटर, साल, कोट बनवाते।
खाँसी आती पीते काढा।
दाँत पढ़ रहे अजब पहाड़ा।

ठण्ढी - ठण्ढी हवा चल रही।
जैसे तन पर बर्फ गल रही।
बन में खो - खो करे लोमड़ी।
हाय बनायी नहीं झोपड़ी।
जाड़े ने सब काम बिगाड़ा।
दाँत पढ़ रहे अजब पहाड़ा।

Aaya Jada


 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017