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आए बादल

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13 -Jun-2018 Suresh Chandra Sarwahara Cloud Poems 0 Comments  1,191 Views
Suresh Chandra Sarwahara

बड़ी दूर से आए बादल
हो इनका सम्मान,
थकन मिटा दें थोड़ी इनकी
गाकर स्वागत गान।
कड़ी धूप में घूम रहे ये
ढूँढ रहे हैं छाँव,
लेकिन इनको दीख न पड़ते
हरियाली के पाँव।
चाह रहे हैं नदियों पर जा
कम करना ये ताप,
किन्तु उड़ी जल की धारा तो
बन गर्मी में भाप।
पड़े सोच में कहाँ गए अब
पर्वत के सब पेड़,
अरे यहाँ के पशु पक्षी भी
किसने दिए खदेड़।
सचमुच सूखे से दरकी है
धरती माँ की गोद,
ऐसे में बच्चों - से बादल
कहाँ करेंगे मोद।
बादल चले गए जो वापस
कलको हमसे रूठ,
नहीं बचेंगे जीव धरा पर
बात नहीं यह झूठ।
बरसें बादल रिमझिम रिमझिम
ऐसे करें उपाय,
हरे पेड़ को काट कभी ना
लें हम इसकी हाय।
जंगल पर्वत बचे रहे तो
आएँ बादल खूब,
ये बरसें तो खेत हरे हों
जगह-जगह हो दूब।
बादल ही करते धरती को
जीवन नया प्रदान,
ताप भूमि का हम करके कम
दें बादल को मान।
*****
- सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"



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