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अब फिर ना आऊंगी

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21 -Sep-2021 PURNIMA KUMARI Sad Poems 0 Comments  147 Views
अब फिर ना आऊंगी

ऐतवार था बेइंतहा तुझसे
मेरी इबादत में बस तू ही तू
दर-ब - दर भटकती उन गलियों से
बस एक दीदार को तेरे
ना जाने क्यों इतनी नफरत ,कभी तो बता दे
अब फिर ना आऊंगी।
छोड़ दी मैं उन गलियों का रूख
अब ना तमन्ना बची
शायद तेरी इबादत कबूल हुई
धीरे-धीरे ही सही
तेरे ख्यालों से रुखसत हो जाऊंगी
अब फिर ना आऊंगी।
अजनबी थे तो अच्छा था, खुद में खुश थी
खुदा ने क्या चीज़ बनाई ये भी,
दर्द के सिवा कुछ मिला ही नहीं
दोष तेरा कहां कसूर तो बस मेरा है
अब फिर ना आऊंगी।
मेरी हर गुस्ताखियो को कर माफ ,क्या करूं
दिल है कि मानता ही नहीं
बस एतवार कर मेरे अल्फाजों का
अब जिक्र ना कर पाऊंगी
अब फिर ना आऊंगी।
पूर्णिमा गुप्ता



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