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अभिनंदन है...अभिनंदन है...

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28 -Feb-2019 Deepak Patriotic Poems 0 Comments  1,174 Views
अभिनंदन है...अभिनंदन है...

शूरवीर, शौर्यपुत्र, तुम्हारा वंदन है,
अभिनंदन है, अभिनंदन है, अभिनंदन है...

घुस गया जो तू प्रलय बनकर शत्रुओं के खेमे में,
धड़कन रुक गई उनकी, जो धड़क रहा था सीने में,
सोच में पड़ गए वो, की ये कौन तूफान आया है,
जिसनें अकेले ही हमारी धरती को जड़ से हिलाया है...

शूरवीर, शौर्यपुत्र, तुम्हारा वंदन है,
अभिनंदन है, अभिनंदन है, अभिनंदन है...

उतरा तू जब उनकी धरती पर, एक कोलाहल सा मच गया,
भारत की जयगाथा और गुणगान, उनके सम्मुख रच गया,
तनिक भी चेहरे पर न खौफ़ और न ही डर की लकीरें थी,
देख तुझे दुश्मनों के चेहरे पर सिर्फ डर से पसीना था...

शूरवीर, शौर्यपुत्र, तुम्हारा वंदन है,
अभिनंदन है, अभिनंदन है, अभिनंदन है...

तत्काल तुमनें अपनीं बुद्धि और विवेक का परिचय दिया,
अति महत्वपूर्ण दस्तावेज ले निर्मल जल में प्रवेश किया,
मिटा दिया समस्त विशिष्ट साक्ष्य जिनसे हानि हो जाती,
धन्य हो भारत माता के यशश्वी पुत्र, झंडा झुकने से बचा लिया...

शूरवीर, शौर्यपुत्र, तुम्हारा वंदन है,
अभिनंदन है, अभिनंदन है, अभिनंदन है...

चल दिये तुम सीना ताने उन डरपोकों के बीच,
हाथ बांध, आंखों पर पट्टी डाल पहुँचे उनके समीप,
वहां भी तुमने दिखाया एक हिंदुस्तानी होने का गौरव,
जैसे अकेला "अर्जुन" खड़ा हो और सामने हो कौरव...

शूरवीर, शौर्यपुत्र, तुम्हारा वंदन है,
अभिनंदन है, अभिनंदन है, अभिनंदन है...

आख़िर सूर्य की धधकती ज्वाला को कौन रोक सकता था,
तू ज़लज़ला है, तुझ जैसे ज़लज़ले को कौन आंक सकता था,
जिया तुमनें दुश्मनों के गढ़ में भी बिल्कुल एक शेर की तरह,
आज पूरा देश तुम्हारा स्वागत करता है ओजस तेज की तरह...

शूरवीर, शौर्यपुत्र, तुम्हारा वंदन है,
अभिनंदन है, अभिनंदन है, अभिनंदन है...

- © रविन्द्र श्रीवास्तव "दीपक"

अभिनंदन है...अभिनंदन है...


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