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Achchhai Burai

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27 -Nov-2016 Rajesh Deshpremi Miscellaneous Poems 0 Comments  616 Views
Rajesh Deshpremi

चोरों के जमात में साधु ही होता है प्रताड़ित
नहीं विश्वास तो सरकारी दफ्तरों में जाकर देखियें।

गलती से फंस कर वह ढ़ो रहा दूसरों का पाप
अच्छा आदमी जी रहा बदनामी में जाकर देखियें।

किन्तु - परन्तु के कारण वह कहीं टिकता नहीं
खा रहा दर - दर की ठोकरें, जाकर तो देखियें ।

हक के लिये लड़ने वाले होते हैं हर जगह प्रताड़ित
रोशनी के लिये दीया ही जलता,आकर तो देखियें।

दुश्मन कमजोरी पकड़ ही करता है अक्सर वार
अगर विश्वास नहीं तो नजर दौड़ा कर तो देखियें।



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