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आधुनिक शिक्षा हुनर सिखाती हैं

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03 -Apr-2022 Raghvendra Pratap Singh Social Issues Poems 1 Comments  124 Views
आधुनिक शिक्षा हुनर सिखाती हैं

आधुनिक शिक्षा, हुनर सिखाती है
मगर संस्कार कहां दे पाती है
पढ़ लिख के युवा पैसे वाला बन जाता है
मगर संस्कारों की कमी के कारण
अपने मां बाप को भी भूल जाता है
आधुनिकता की इस चकाचौंध में
लोग पैसे को ही सबकुछ मान रहे
मां-बाप घर-परिवार छोड़कर
विदेशों में ही बस जा रहे है
बात करने की शैली नही अब के युवाओं में
अमर्यादित उनके व्यवहार हो चुके है
फैशन के नाम पे जिस्म की नुमाइश
आजादी के नाम पे निरकुंश हो रहे है
पैसा ही है सबकुछ, यही दिमाग में घोला जा रहा
मानवता एक धर्म है यह भुला जा रहा
अब याद कहां है अपने व्रत त्योहारो का
अब क्रिसमस, न्यू ईयर हमारे त्योहार हो रहे है
अपनी संस्कृति पर गर्व नही हमको
पश्चिम संस्कृति हमारी पहचान हो गई है।
राम कृष्ण नही, जीसस यीशु हमारे भगवान हो गए है.
अपनी राष्ट्र भाषा बोलने में शर्म आती है
अब अंग्रेजी हमारी पहचान हो गई है
पहले होता था दादा पोतो सहित संयुक्त परिवार
लेकिन अब परिवार की बदल गई परिभाषा
केवल मैं, बीबी मेरे बच्चे यही परिवार का हिस्सा
-राघवेंद्र प्रताप सिंह



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1 More responses

  • poemocean logo
    Raghvendra Pratap Singh (Registered Member)
    Commented on 16-May-2022

    मस्त.

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