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अधूरे ख्वाब

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03 -May-2016 Sunilshr98@gmail rawat Life Poem 0 Comments  1,401 Views
अधूरे ख्वाब

अधूरे ख्वाब होने ज़रूरी है
अधूरे ख्वाब नायाब होने ज़रूरी हैं

यूँ तो हर जीव जंग करे बैठा है
यूँ तो हर फकीर ,रंग लिये बैठा है
भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में भी इन्सान
वक्त को हराने बैठा है

कर गुज़र जाऐ सपने वो सुहाने अलबेले हैं
ऊची ऊंची इमारत के नीचे बड़े बड़े तबेले हैं
कितना भाग पाया तू, कितना और है भागना
ऐक शहर से दूसरे शहर, ये बदलते मेले हैं

अधूरे ख्वाब होने ज़रूरी हैं
अधूरे ख्वाब नायाब होने ज़रूरी हैं।

अधूरे ख्वाब


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