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अगर मेरे पंख होते

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23 -Sep-2021 Madhu Birds Poem 0 Comments  106 Views
Madhu

अगर मेरे पंख होते तो,
उड़कर सारे ब्रह्मांड की सैर कर ली होती।
न कोई रोक टोक होती,
जिधर जी करता अपना बसर कर लिया होता।
एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर,
डाल डाल झूमना,
न कोई फिक्र न कोई रुकावट होती,
सामाजिक बंधनों की कोई डोर न होती।
अगर मेरे पंख होते तो,
उड़कर सारे ब्रह्मांड की सैर कर ली होती।
आसमान में पक्षियों की तरह उड़ना,
न पकड़ पाता कोई,
एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना और आना,
मज़ा आता इस लुका छुप्पी का।
अगर मेरे पंख होते तो,
उड़कर सारे ब्रह्मांड की सैर कर ली होती।
न मोटर की ज़रुरत ,
न रेलगाड़ी या घोड़ा गाड़ी की,
बस पंख फैलाये चल पड़े,
पतंग की तरह आसमान में लहलहाते हुए।
अगर मेरे पंख होते तो,
उड़कर सारे ब्रह्मांड की सैर कर ली होती।
पेड़ पौधों की ठंडी हवा खाकर,
सारे फल तोड़ लिए होते,
तरस गया था माली के डर से,
जिनको खाने के लिए।
अगर मेरे पंख होते तो,
उड़कर सारे ब्रह्मांड की सैर कर ली होती।
पैसों की बचत और ख़ुशी का,
एक अलग ही अनुभव होता।
अगर मेरे पंख होते तो,
उड़कर सारे ब्रह्मांड की सैर कर ली होती।

मधु शहानी
Fremont, California (USA)



Dedicated to
अपनी माँ श्रीमती निर्मला पेसवानी को समर्पित

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