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ऐसा दिल ढूँढता हूँ

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21 -Aug-2020 Mamta Rani Love Poem 0 Comments  84 Views
Mamta Rani

होकर सफर का हमराही मंजिल ढूँढता हूँ
मिले दिल को सुकून ऐसा संगदिल ढूँढता हूँ

बातों में हो साँसों में दिल के जज़्बातों में हो
दूरियों में भी पास हो ऐसा स्वप्निल ढूँढता हूँ

चाह नहीं उस चाहत की जो होकर भी ना हो
अचेत से मन को जगा दे ऐसा कामिल ढूँढता हूँ

शब्दों का नहीं भावों के एहसास भी जो पढ़ सके
एहसास में छिपे प्यार का मैं मुक़ाबिल ढूंढता हूँ

गम में छिपे आँसू को आँसू में छिपे गम को समझे
कोमल हो जिसका हृदय ऐसा सनम दिल ढूँढता हूँ

अधरों पे जो मुस्कान लाए मधुर एहसास हो तुझमे
साँसों में वो सुकून हो सुनके ऐसा साहिल ढूँढता हूँ

ख्वाब बनके जो हर पल दिल के एहसासों में हो
मुस्कान आये सोंच के लबों पे ऐसा वासिल ढूँढता हूँ

ममता रानी


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