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अजीब दीवाना और अनोखी दीवानी

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06 -Sep-2021 Naman Love Poem 0 Comments  91 Views
अजीब दीवाना और अनोखी दीवानी

एक अजीब दिवाना था और एक अनोखी दिवानी थी
बचपन की यारी में साथ निभाने की दोनों ने मन में ठानी थी

फिर एक दिन वो अकेले बैठ कर आंसू बहा रही थी
पता चला दीवाने को वो छोड़ कर जा रही थी

वादा किया उसने की मैं तुम्हरा जीवन के हर मोड़ पर साथ निभाऊंगा
छुट्टियों में तुमसे मिलने मैं हमेशा आऊंगा

छुट्टियों में वो हर बार मिलने उससे जाता था
बातें करता उससे और साथ में वक्त बिताता था

उन दोनों को आपस में दिखता अटूट विश्वास था
धीमे धीमे पनप रहा दोनों में प्यार का एहसास था

रिश्ता बदला प्यार में दोस्ती हुई पुरानी थी
एक अजीब दिवाना था और एक अनोखी दिवानी थी

वक्त ऐसा भी आता है जो बहुत रुलाता है
छोटी छोटी बातों पर भला कौन मुंह फुलाता है

जब भी एक रूठता था तो दूसरा उसे मनाता था
वो दिवाना उसकी यादों के अश्क बहाता था
अकेले में रो रो कर रात वो बिताता था
कोई पूछता कैसे हो अच्छे हैं! कहकर वो मुस्कुराता था।

बिखरे थे सपने और मिट गई वो कहानी थी
एक अजीब दिवाना था और एक अनोखी दिवानी थी।
- नमन



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