अमीर और गरीब...

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19 -Jun-2017 Piyush Raj Social Poems 0 Comments  515 Views
Piyush Raj

अमीर और गरीब

दाल चावल महँगे हो गए
और सस्ती हो गयी डाटा
एक वक़्त की रोटी के लिए
गरीब के घर नही है आटा

देखता हूँ इस दुनिया को
तो लगता है बड़ा अजीब
किसी के पैरों में है बाटा
तो किसी को चुभ रहा है कांटा
कोई चलता है कोसो पैदल
तो किसी के पास है टाटा

गरीब चाहता धन -दौलत
अमीर चाहता सुख चैन
ये सब पाने के लिए
दोनों के तरसते है नैन

गरीब अपनी झोपडी में
आराम से है सोता
महलों में रहकर अमीर
धन के लिए है रोता

एक दिन सबको है
मिट्टी में मिल जानी
अमीर हो या गरीब
सब की यही कहानी

पियुष राज
दुमका,झारखण्ड
P-65/19 जून 2017




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