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अमृत कलश

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16 -Nov-2019 MANOJ POOSAM Daughter Poems 0 Comments  62 Views
MANOJ POOSAM

मां तूने जनम देकर मुझें सीवेज टैंक में कयो फेंक है, आई
मां तूने मुझें सीने से नही लगाई, और न ही अमृत जैसा दूध है नही पिलाई |

धनय है ,वे मातायें जिनहोनें मुझें असपताल है पहुचाई
मां तूने जनम देकर मुझें सीवेज टैंक में कयो फेंक है,आई |

यहॉ मुझें एक नही बलिक कई माताएं है, मिल पाई
और ऊनका दूध है पीकर मैं बडी़ हो पाई
मां तूने जनम देकर मुझें सीवेज टैंक में कयो फेंक है,आई |

मां के दूध के ताकत से मैं संक्रमण से लड़ आई
मां तूने जनम देकर मुझें सीवेज टैंक में कयो फेंक है,आई |

मां मेरी दिल के अंदर से यही पुकार कयो मां आऐसा कयो कर आई
मां तूने जनम देकर मुझें सीवेज टैंक में कयो फेंक है,आई |

मां मेने तो पल भर भी तुमहारे साथ न रह पाई और मैं हो गई पराई
मां तूने जनम देकर मुझें सीवेज टैंक में कयो फेंक है,आई |

धनय है ,ऐसी माताएं जिनहोनें मुझें ममता भरी दूध है ,पिलाई
मां तूने जनम देकर मुझें सीवेज टैंक में कयो फेंक है,आई |

मां मैं तो बचपन से ही कमजोर हूं आई कयो नही है ,मुझें
इमयूनोगलोबिन वाली दूध है , मुझें पिलाई |

मां तूने जनम देकर मुझें सीवेज टैंक में कयो फेंक है, आई
कयो नही मुझें इस भयानक हरे दसत से हैं बचाई |

मां मुझमें कयो नही परतिरोधक छमता है ,बनाई
मां तूने जनम देकर मुझें सीवेज टैंक में कयो फेंक है,आई |

© २०१९ मनोज पूसाम



Dedicated to
माताओं को

Dedication Summary
ऊन माताओं को जो आएसा करती |

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