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मुसीबतों का पहर

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18 -May-2022 Buddha Prakash Motivational Poems 0 Comments  29 Views
मुसीबतों का पहर

मुसीबतों का पहाड़ जब टूटता है,
इंसान घबराया-सा फिरता है;

धैर्य और हिम्मत खोने लगती है आस,
आँखों के साथ ह्रदय भी रोने लगता है ;

सुंदर-सा संसार कष्टों का अंबार लगता है,
छोटी-छोटी बातों से मुश्किलों की आह झलकती है ;

विश्वास की जगह पर अविश्वास पनपने लगता है ,
हारने लगता है जितने की ख्वाहिशों का हर पल ;

मन मस्तिष्क के द्वार भी बंद हो जाते हैं अपने आप ,
छूटने लगता साथ और सहारा बेगाना हो जाता है ;

डटकर नहीं करता मुकाबला ऐसी मुश्किलों में अगर ,
आशा की उम्मीद भी निराश कर देती है जीवन को ।



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