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"अन्दर की कुलबुलाहट"

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09 -Mar-2022 Renu Kapoor Motivational Poems 0 Comments  99 Views

मेरे अन्दर की कुलबुलाहट,
तलाश रही थी अपना शिकार ।
इधर-उधर झाँक रही थी ।
अगल बगल ताक रही थी ।
मगर कोई नजर नहीं आया।
शिकार तो हो मन भाया ।
तभी बिजली सा मन में कौधा।
तू तो है महान योद्धा ।
क्यों असहय लाचार को
शिकार बनाता है ।
क्यों उन पर अस्त्र- शस्त्र
चलाता है ।
अपने से महान या समान
पर प्रहार कर ।
अपने बल और शौर्य का
कुछ तो सम्मान कर।
ञान - चक्षु जाग गये,
खुल मेरे भाग्य गये ।
क्यों ना अपना ही
शिकार करूँ ।
अपनी विषाक्तियो , दोषों
का संहार करूँ ।
मन ने यह संकल्प लिया ।
और अपनी इस प्रतिज्ञा में
सफल हुआ ।

रेनू कपूर



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