Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

गिलहरी, Squirrel

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15 -Jul-2018 nil Animals Poem 0 Comments  305 Views
गिलहरी, Squirrel

दिनांक १३.०७ .२०१८ को बाल कल्याण एवम बल साहित्य शोध केंद्र में पठित बालगीत : गिलहरी टेर टेर कर कहे गिलहरी /बालगीत है मेरा प्रहरी जनम जनम का मीत है मेरा जीवन गीत है मेरे आँगन की बगिया में /एक गिलहरी रहती हर मौसम के ते

खरगोश

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24 -Dec-2017 Suresh Chandra Sarwahara Animals Poem 0 Comments  1,669 Views
खरगोश

कितना प्यारा कितना भोला जैसे हो रूई का गोला , चाहा इससे बात करें हम पर मुँह से यह कुछ ना बोला। लम्बे लम्बे कान खड़े हैं हीरे जैसे आँख जड़े हैं, चलते हैं ये फुदक फुदक कर पर फुर्तीले बहुत बड़े हैं। ढका मुलायम बालों से

Bhookhi Gaay Kachra Charti

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15 -Nov-2017 Dr. Roopchandra Shastri Mayank Animals Poem 0 Comments  689 Views
Bhookhi Gaay Kachra Charti

Bhookhi Gaay / Gaiya Kachra Charti. Hungary cow eat whatever she found around the road side. She is hungary so she eat garbage like it is a sweet dish. Her calf ask to her that how he can eat garbage? He say that our master milk all milk and he do not leave any milk for me. Calf is looking here and there in the hope that he could get some food grass.

JALPARI

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04 -Sep-2017 RAMESH BISHT Animals Poem 0 Comments  1,227 Views
JALPARI

Main Macchli mei Jal Pari Pani ki Main Hoon pari Rang Birangen Rangon se Bhari Hath Lagaane se lagun darri darri Jine ki khawaishyen liye khadi Main Macchli Mei Jal Pari

बिल्ली मौसी

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04 -Feb-2017 Suresh Chandra Sarwahara Animals Poem 0 Comments  2,176 Views
बिल्ली मौसी

बिल्ली पड़ी खाट पर ओढ़ रजाई भारी , बोली जान लिए जाती है अबकी तो बीमारी । आओ मेरे प्यारे चूहों कर लो अंतिम दर्शन, क्षमा माँगने को करता है सचमुच अब मेरा मन। जीवन भर मैंने तुमको जो मारा और सताया , उन कर्मों का अंत समय मे

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