Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

अपनों का साथ

0
09 -Apr-2019 Akanksha Thawait Family Poems 0 Comments  153 Views
अपनों का साथ

अपनों का साथ
कुछ सपनें देखे हैं आज, किसे बताएंगे,
पर उनके पूरे होने के इंतज़ार में पलके जरूर बिछाएंगे,
कुछ बेचैनियाँ हैं इस दिल में किसे बताएंगे,
आँसू का एक कतरा भी हम नही बहाना चाहते,
पर ये पलकें भी इन्हें कब तक रोक पाएंगे,
अपने रूठे हुए हैं, पर हमसे ये तकदीर नही रूठा,
उस खुदा के हाथों से मेरा हाथ कभी नहीं छूटा,
उम्मीद तो अभी भी लगा रखी है रूठों को मनाने का,
पर वो वक़्त शायद अभी आया नहीं है,
जब वो वक़्त आएगा तब ये लम्हें खो चुके होंगें,
एहसास उन्हें भी होगा और हमें भी उन लम्हों के खो जाने का,
पर ये एहसास ही है जो रूठों को मनाएगा और अपनों को अपनों के पास लाएगा।

आकांक्षा थवाईत
रामगुड़ी पारा रायगढ़



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017