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Apno ki Toli

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09 -Jan-2017 Madhu Family Poems 0 Comments  1,161 Views
Madhu

अपनों की टोली

ममता भारद्वाज "मधु " द्वारा रचित

अपनों की टोली हो,
नित हंसी- ठिठोली हो|
मीठी तकरार हो,
उसमे भी प्यार हो|
साथ रो लें ,साथ हंस लें
एक दूजे पर व्यंग्य कस ले |
बिन कहे समझ जाए ,
भावों की बोली हो |
अपनत्व के हों
घर -घर रंगीन उजाले |
हर दिन दीवाली हो ,
हर दिन में होली हो|
अपनों की टोली हो,
नित हंसीं -ठिठोली हो|

पढ़ने के लिए धन्यवाद |



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