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अपनों को अपना माना मैंने

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16 -Aug-2016 chetan sharma Bewafai Poems 0 Comments  1,893 Views
अपनों को अपना माना मैंने

अपनी पीठ से निकले, खंजरों को गिना जब मैंने
ठीक उतने ही थे जितनों को, गले लगाया था मैंने !!
क्या कसुर था मेरा, अपनों को अपना माना मैंने।
कसूर था मेरा इतना अपनों में परायो को ना पहचाना मैंने ।
देखी जब मैंने पीठ हालत तभी उन अपनों को पहचाना मैंने ।
मारते वो खंजर अगर दिल पर तो बड़ा सुकून मिलता मैंने ।
अबतक कहा किसी को अपना बनाने से पहले सोचा मैंने ।
आज देखकर उनके इस तरह के चहरे बार बार सोचा मैंने।
कि काश इनको अपना बनाने से पहले सोचा होता मैंने ।
आदि शर्मा चेतन मण्डावर 7891095030



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