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अर्धांगिनी [Wife]

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22 -Jan-2021 Parmanand kumar Woman Poems 0 Comments  100 Views
Parmanand kumar

अर्धांगिनी
"""""""""""""" Wife By Parmanand kumar
Andharatharhi
Madhubani
Bihar
22 jan, 2021



फूलों से भी नाज़ुक होती है
संबंध दाम्पत्य जीवन की...

पत्नी का प्यार यदि मिल जाए
तो मृत्यभूमि भी लगती है जन्नत सी.

समंदर से भी गहरा है
दाम्पत्य जीवन की गहराई...

मगर विश्वास के मापन से
हम उसे भी नापा सकते हैं....

खुदा भी रूठ जाता है
यदि घरवाली रूठ जाती हो..

खुशियाँ जन्नत सी मिल भी जाए
तो, वो बड़ा विरान होता है...

अगर जीवन के संग से
संगनी मेरी टूट जाती हो..

अगर उसे साथ हो साजन के
पहाड़ों सा दुख भी झेल जाती है वो....

पर्वत सी पीड़ भी आए तो
हँसके झेल जाती है वो...

साजन का घर सजाने हेतु
बाबुल का घर छोड़ आती है वो...

माँ के आँचल में अपनी
शोख़ जवानी छोड़ आती है वो ...

बड़ा त्यागी, तपस्विनी बनकर
हमारी अर्धांगनि बन जाती है वो

अपने नैहर की सारी खुशियाँ
एक अजनबी के लिए छोड़ आती है वो..

हमारी माँ को माँ कहते हुए
अपनी माँ की ममता छोड़ आती है वो

अपनी शोख़ सखियों को छोड़
हमारी बहन से रिश्ता जोड़ लेती है वो

समय के काल चक्र में बंधकर
मेरे बच्चों की बन जाती माँ है वो

अपनी सारी बचपन की खुशियाँ
मेरे बच्चों में उड़ेल देती है वो...

खुद रिक्त व तिक्त सा होकर भी
मुझसे मुस्कराकर दुख भूल जाती है वो...

ऐसी होती है जीवन संगिनी
ये प्रेम का पाठ पढ़ा जाती है वो!!!



By Parmanand kumar
Andharatharhi
Madhubani
Bihar

अर्धांगिनी  [Wife]


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