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अशांति का सबब

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08 -Mar-2022 Ravi Motivational Poems 0 Comments  333 Views
Ravi

जानता है सब जग में, शांति ही सुख का कारक है,
अहम भरी सोच ही, विध्वंसकारी युद्ध का विचारक है।

जियो और जीने दो का सच, हम सब खूब जानते हैं,
पर स्वार्थ में, आसानी से इसको दरकिनार कर‌ जाते हैं।

हर देश के लोगों के लिए, बसर के लिए ज़मीन काफ़ी है,
फिर भी दूसरे देशों का, ज़मीन हड़पने का प्रपंच रचाते हैं।

आदमी किसी भी देश का हो, आदमी तो सिर्फ़ आदमी होता है,
फिर भी गोरे-काले में भेद कर, ईश्वरीय कृति में दाग़ लगाते हैं।

अलौकिक ताकत तो सबके लिए, दुनिया में बस एक ही है,
फिर भी इसे मज़हबों में बाॅंट कर, ईश्वर को बदनाम करते हैं।

स्वछंद से रहे अगर हर कोई, तो कहाॅं गुटबंदी की ज़रुरत है,
भारत जैसा रहे अगर हर देश तो, 'नाटो' की कहाॅं ज़रुरत है।

विज्ञान का इस्तेमाल, मानव कल्याण के लिए करे हर कोई,
भोजन-पानी, हवा, रितु, उर्जा का, आनन्द उठाये हर कोई।

तकनीक का इस्तेमाल कर, अगर विध्वंसकारी बम बनाये हम,
विज्ञान का विनाश में उपयोग कर, अपनी ही अर्थी सजाये हम।

माना दुनिया सदियों से, अमानवीय कारणों से मिटती आई है,
इक्कीसवीं सदी में, विज्ञान से मानवता जगाने की बारी आई है।

रचयिता: डॉ. रवि भूषण सिन्हा, रॉंची, झारखंड।

अशांति का सबब


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