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बच-बचके चल मेरे यार।

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21 -Feb-2020 Anil Mishra Prahari Social Poems 0 Comments  414 Views
Anil Mishra Prahari

बच- बचके चल मेरे यार।

यहाँ जिसे अपना जताओगे
ठोकर भी उसी से खाओगे,
मुस्कुराता, मासूम चेहरा छलेगा
यह विष-बेल जहर ही फलेगा,
बन्द आँखों से मत कर सफर
अपना बनाके तुझे देंगे जहर।
पैरों के नीचे सुलगता अंगार
बच- बचके चल मेरे यार।

ये आशियाँ में आग तक लगा देंगे
हँसकर ही तुझे दगा देंगे,
मत रोना किसी के सामने
कोई नहीं आता गिरते को थामने,
दुनिया की रफ्तार बड़ी तेज है
हर तरफ बिछी काँटों की सेज है।
राहों में रोड़ों के फैले अम्बार
बच- बचके चल मेरे यार।

ये बीच मझधार तुझे छोड़ देंगे
अपने ही विश्वास तेरा तोड़ देंगे,
हर मोड़ पर हैं धोखे के बाजार सजे
तुम लुटो और उनके हैं मजे,
उन्हीं के कानून और लगे पहरे भी
दफ्तर,अदालत,सदन सब बहरे भी।
पथ बीच दिखती है तीखी कटार
बच - बचके चल मेरे यार।

अनिल मिश्र प्रहरी।



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