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बचपन के खेल

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17 -Jun-2021 Alok Pandey Childhood Poems 0 Comments  237 Views
बचपन के खेल

बचपन के खेल हमें खूब भाता था,
गिल्ली-डंडा या हो छुपम-छुपाई
सब बच्चों को इसमें मजा आता था।

कभी खेलतें चोर सिपाही,
कभी खेलते कांचा गोली।

हर दिन अपनी मौज रहती,
खूब खेलते आँख-मिचौली।

रस्सी-कस्सी पिट्ठू गरम,
खेलते साथ हम हरदम।

पोसम्पा था खेल निराला,
हाथ गाड़ी पहिया वाला।

चोर-सिपाही-राजा-मंत्री
अनोखा खेल,
मस्ती से करते थे हम बोरा
रेस।

हर खेल में मिलती थी,
हमको खुशियां-खुशियाँ।

चाहे खेलों इत्ता-बित्ता,

या खेलों सतगोटिया।

स्व रचित ........आलोक पांडेय



Dedicated to
दीपक, अंगद, दिव्यांशु

Dedication Summary
मेरे सभी उन मित्रो को जिनके साथ मेरा बचपन बीता।

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