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Balatkaari Babe -Jash Panchi

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29 -Jun-2016 Panchi Social Issues Poems 0 Comments  617 Views
Panchi

अन्धी हो गई आस्था ईमान बिकने लगे
चोर पाखंडी के आगे सर झुकने लगे
पढ़ लिख कर भी धोखा खा बैठे
इन बलात्कारियों को हम भगवान् बना बैठे

माँ बहनो की इज़्ज़त से जो खिलवाड़ करते है
खाली बैठ हमारे पैसे पर ऐसो आराम करते है
मंदिर मस्जिद भूल डरो पैर जा बैठे
इन बलात्कारियों को हम भगवान् बना बैठे

करोड़ो की सम्पति हो गई बाबा की फिर भी फ़कीर कहलाते है
नहाते है जिस दूध मे भगतो को उसको खीर खिलते है
किसी को राधे माँ किसे को बापू बना बैठे
इन बलात्कारियों को हम भगवान् बना बैठे

दुकानदारी बन कर रह गई कोई नहीं पूछता भगवान् को
अयाशी मे miss use करते मे आपके दिए गए दान को
पागल है पंछी जैसे जो सच सुना बैठे
इन बलात्कारियों को हम भगवान् बना बैठे

Jash Panchi



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