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बना कहाँ से इतना पानी |

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22 -Mar-2017 DINESH CHANDRA SHARMA Environment Poems 0 Comments  1,382 Views
DINESH CHANDRA SHARMA

बना कहाँ से इतना पानी |
अग्नि पुंज सी धधक रही थी , जब ये अपनी धरती |
सूरज से ही उपजी थी ये , सूरज सी थी तपती |
युगों युगों जब रही प्रज्वलित , पानी कैसे आया
झर झर झरने कल कल नदियाँ , सागर है लहराया |

धरती पर पानी है सारा ,भाग तीन चौथाई |
बना कहाँ से इतना पानी, बात समझ न आयी |
है न एक अनबूझ पहेली ,क्या ओ सकता उत्तर |
सदा रही हैं सारी चीजें , रूपों का बस अंतर |

पहले घटक समझ लें इसके , दो भाग हाइड्रोजन |
बनता है पानी जब मिलता , एक भाग ऑक्सीजन|
उभय घटक थे गैस रूप में , धधक रही जब धरती |
पानी जैसा कब था पानी , ज्वालायें जब उठती |

कमी हुई जब ज्वालाओं में , घिर घिर |बरसे बादल |
भाप बना और फिर से बादल , गिरा धरा पर जब जल |
युगों युगों तक चला यही क्रम ,धरा हुई तब शीतल |
पृकृति ने पहुचाया इसके ,कण कण में जल ही जल |

विकसा जल का चक्र धरा पर , पर्वत से चल सागर |
झील ताल निर्झर और नदियाँ , बहकर या फिर रिसकर |
जीवन भी विकसा धरती पर ,इससे ही हरियाली |
वरना रूखे सूखे ग्रह सब , नीरस एवं खाली |
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