Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

बरसात की बूंदे

0
17 -Jun-2021 manojkumar Raining Season Poem 0 Comments  303 Views
बरसात की बूंदे

टप- टप टपक रहे हैं बूंदे बादल से।
भीग रहे हैं गोरी के रूप हरे केश।
वो झूमती है मस्ती में इठलाती है।
टर्र- टर्र मंडूक आवाज़ लगाए, देते कर्ण में संदेश।




ओझल आंखो के नजारे, तेजी से जब आंधी आई।
बरसात की बूंदे पड़े बदन पर, वो कहने लगे चिपका लो आकर।
थप- थप ता ता थैया मृदंग बजाए मेंढक।
हिम पुरवइया गाल में छू जाए आकर।




सौंदर्य अनुभव किए, बागों के फूलों से बाते किए।
कभी वहां कभी यहां, फूलों के कलियों से।
जब- जब घन- घोर गरज से पानी आए।
चिपक जाती शर्माकर, पेड़ों के छांव में बाते करती कलियों से।





फव्वारा आया पानी के तेजी से उमड़ कर।
म ज्ज न किए घूम- घूमकर बरसातों में।
भर गए ताल तलैया बरखा में।
लौट आईं वो अपने घर, समझाया मां को हर बातों में।




लेखक- मनोज कुमार (गोंडा उत्तर प्रदेश)

बरसात की बूंदे


 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017