Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

बसंती फरियाद

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09 -Feb-2022 KHEMARAM CHHAPRWAL Basant Poem 0 Comments  183 Views
बसंती फरियाद

घनघोर घटाये , घटो घट नीर बरसाएं। प्यासी धरती पर नदिया बहाए।। कल कल छल छल संगीत सुनाए। घनघोर घटाए सबको मन भाए।। पंछी करे कलरव प्रीत मन जगाए। मितवा बसंत ऋतु मे मिलन सताए।। मनमोहक हरियाली सब जन मन भाए। कुसुम सुगंध व

लो आ गया बसंत

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22 -Jun-2021 राजेश्वरी पंत जोशी Basant Poem 0 Comments  392 Views
लो आ गया बसंत

आ गया बसंत, लो आ गया बसंत, खुशबूओं से भरा, लो आ गया बसंत. सरसों का फैला है, खेतों में पीला रंग, हरियाली चूनर ओढ़े, उड़ा रहा प्रकृति में रंग. टेसू के फूलों से , चुरा रहा है रंग. आँखों में बसाये अपने , प्रेम प्रीत के रंग. जीव

बसंत ऋतु का आगमन

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12 -May-2021 Krishna Sharma Basant Poem 0 Comments  749 Views
बसंत ऋतु का आगमन

लेखक:- कृष्णा शर्मा स्वरचित पेड़ों पर कलियाँ फूट पड़ी मन सरसों सा लहराया है मेरे जीवन में एक बार फिर से बसंत यह आया है फूलों में रंग लगा भरने कोयल की कूक सुनाई दे वह पवन बसंती है देखो मनवा को जो पुरवाई दे हरियाली खे

लेकर चल मुझे कहीं दूर

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24 -Mar-2021 Keshav Basant Poem 0 Comments  773 Views
लेकर चल मुझे कहीं दूर

लेकर चल मुझे कहीं,दूर ख्वाब हो अपना सा,दिल की किताब हो अपना। मैं भी हूं-सनम तू भी है,शहर भी है,इश्क है तो चाहतों का असर भी है।। तुमने मेरा गुलाब लेकर ऐसे नजर मिलाई,साथियां पानी में प्यास जगाई। आज तो तुम-आज तो मैं,इश्

पुटभेद छंद "बसंत-छटा"

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15 -Mar-2021 Naman Basant Poem 0 Comments  419 Views
पुटभेद छंद

पुटभेद छंद "बसंत-छटा" छा गये ऋतुराज बसंत बड़े मन-भावने। दृश्य आज लगे अति मोहक नैन सुहावने। आम्र-कुंज हरे चित, बौर लदी हर डाल है। कोयली मधु राग सुने मन होत रसाल है।। रक्त-पुष्प लदी टहनी सब आज पलास की। सूचना जिमि देवत आ

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