Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मैं पन्नो पर

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02 -Jun-2021 GARIMA YADAV Beauty Poems 0 Comments  185 Views
मैं पन्नो पर

मै इन पन्नों पर अपनी ज़िन्दगी के कुछ लम्हों को उकेरना चाहती हूँ गम और ख़ुशी लिखना चाहती हूँ मैं अपनी ज़िन्दगी लिखना चाहती हूँ.

नई पड़ोसन

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03 -Apr-2021 सिफ़र Beauty Poems 0 Comments  306 Views
नई पड़ोसन

नई पड़ोसन ये खबर ताज़ा थी ,अभी है नई जानकारी , हाल ही किचन की खिड़की बाहर दिखायी दी ,, सुबह की धूप तक ठण्डी लग रही थी , गीली बूंदा बांदी में सुबह संवर रही थी ,, किताबों में तो दर्ज़ हो चूका है कबसे , अब ऐसी सुंदरता को रहोगे तरस

धूप और छांव

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03 -Apr-2021 सिफ़र Beauty Poems 0 Comments  188 Views
धूप और छांव

धूप और छांव एक कतरा धूप , एक मुट्ठी छांव , चल बांट लेते है , आधा-आधा गाँव ,, मन भर सुनेहरी , भोर से ले आओ , सवा मन गहरी , सांझ से मंगवाओ ,, जाड़े की धूप में , चारपाई के पायें , और गरमी के दिनों , घने आम के सायें , एक धूप ऐसी की , मेरा

तुम क्या समझो

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22 -Jan-2021 bharat Beauty Poems 1 Comments  661 Views
तुम क्या समझो

तुम क्या समझो स्वरचित मत समझो की तुम्हें देख कर मैं जीता हूँ. या नहीं देख कर मर जाता हूँ..... या तेरे योवन सागर मे डुबकी लेने या फिर नयन सूधा रस पीने को आता हूँ.... देखा नहीं आज तक तेरे वक्षस्थल को एड़ी तक विखरी है या फिर व

क्या है तुम में

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02 -Jan-2021 bharat Beauty Poems 0 Comments  574 Views
क्या है तुम में

क्या है तुम में जो पाने को मैं पागल सा हो जाता हूं... तुम्हें देखकर ना जाने क्यूं अपने से ही खो जाता हूं... भीगी पलकों के अंतर से नयनों की कुछ मौन शरारत जिसे छुपाने में असफल उठकर नयन पुनः गिर जाते, जैसे विरहिन बिजली से

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