Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

IMMORTAL STAINS

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17 -Mar-2020 poorvi sethi Beauty Poems 0 Comments  50 Views
IMMORTAL STAINS

A dimly lit room Ivory pages rustling Hues like azure and maroon Kept undisturbed from outside bustling Each brush stroke A fragment of expression Shackled emotions slowly broke Like whispered confessions A steady hand Going wherever the flow of ideas went Jewel tones like patchwork on a piece of land She stands back, tired and spent Look at the colours that bleed To form a map not deciphered with ease To solace and serenity it leads These immortal stains will live long after mankind has ceased

मांग में चुटकी भर सिंदूर लगा के......!!

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26 -Apr-2018 pravin tiwari Beauty Poems 0 Comments  1,360 Views
मांग में चुटकी भर सिंदूर लगा के......!!

मांग में चुटकी भर सिंदूर लगा के, बालों में गजरा सजाती है..........! जब पहनले वो साड़ी तो, कसी हूर से कम नहीं लगती है.........! कल तक थी जो बेटी किसी की, आज बहू का दर्जा वो निभाती है.........! सास ससुर की मर्यादा के लिए, अपने सिर पर पल्लू

एक हसीन फूल के जैसी है वो......

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28 -Mar-2018 pravin tiwari Beauty Poems 0 Comments  1,237 Views
एक हसीन फूल के जैसी है वो......

एक हसीन फूल के जैसी है वो...... बड़ी नटखट बड़ी प्यारी है वो...... जैसे खुशबू घुल जाती हवाओं में, सब से ऐसे घुल मिल जाती है ‌वो...... मायूसी कभी उसके चेहरे पर नहीं, हर पल यूं हंसती मुस्कुराती है वो...... बातें उसकी ऐसी के बस सुनते ह

तुम्हारी मोहनी सूरत तो हर पल आँख में रहती

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07 -Mar-2018 Madan Saxena Beauty Poems 0 Comments  646 Views
तुम्हारी मोहनी सूरत तो हर पल आँख में रहती

तुम्हारी याद जब आती तो मिल जाती ख़ुशी हमको तुमको पास पायेंगे तो मेरा हाल क्या होगा तुमसे दूर रह करके तुम्हारी याद आती है मेरे पास तुम होगें तो यादों का फिर क्या होगा तुम्हारी मोहनी सूरत तो हर पल आँख में रहती दिल म

मैं तेरा सिंगार बनूं.......!!

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29 -Jan-2018 pravin tiwari Beauty Poems 0 Comments  727 Views
मैं तेरा सिंगार बनूं.......!!

तेरे हुस्न-ए-जमाल की, मैं मिसाल बनूं...... तू जब संवरने लगे, मैं तेरा सिंगार बनूं....... बिखरी लटे जब तेरी, सुलझाने लगे, तेरी जुल्फों में लिपट के, गजरे का हार बनूं...... यूं तो डूब गया हूं मैं तेरी इन झील सी नशीली आंखों मे, पर नशा

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