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बेच डाल

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22 -Oct-2015 Sunny Kapoor Memories Poems 0 Comments  724 Views
Sunny Kapoor

वो चश्मा आज भी मेरे जेहन में बसता है ,ै
पुराने कल में मेरे आज को कसता है ,
दराज़ में धूल से चाहे हो सना हुआ ,
बाऊजी का चेहरा धुंधली यादो में बना हुआ ,
उस अक्स पर रेत को डाल :
कोई कह रहा है उसको OLX पर बेच डाल !!!!

कुर्सी आज भी पड़ी है जँग लगी हुई,
सीढ़ी के इक कोने में तंग लगी हुई,
माला जपती थी जिस पर मेरी दादी कभी,
बलाएँ टलती थी मेरे घर की जो सभी,
अनंत यादे समेटे हुए अपने भीतर :
कोई कह रहा है उसको बेच दे Quikrr !!!!

टूटे पाये वाला वो चरमराता तख़्त,
सोये जिस पर दादा बूढ़े पेड़ की हो दरख्त,
भीतर से नर्म बाहर से दिखाते स्वंम को सख्त,
फांस से जिसकी कभी निकला जो उनका रक्त ,
उन यादो को आज कैसे दे बाँट :
कोई कह रहा है उसको बेच दे on Flipcart

कभी दिल बड़े थे कमरे हुआ करते थे तंग,
आज कमरे बड़े हुए क्या दिल हुए इतने तंग,
चंद सिक्को का मोल शायद कुछ ज्यादा हुआ,
जो इन अनमोल धरोहर को हम नहीं रख सकते संग !!!



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