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बेटी बचाओ।

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07 -Oct-2019 Anil Mishra Prahari Daughter Poems 1 Comments  234 Views
Anil Mishra Prahari

जन्म मुझे चाहे जितना दे
मगर कभी बेटी में ना दे।

मिली हमें न माँ की ममता
दहशत में लघु जीवन पलता,
दुनिया में आने से पहले
जतन कत्ल का होने लगता।
माँ के आँचल की है चाहत
पापा के कदमों की आहट,
खेलूँ आँगन में अपनों संग
मधुर- मनोहर एक सपना दे ।
जन्म मुझे चाहे जितना दे।

तीन माह की आज हुई मैं
माँ तुझको सौ- बार छुई मैं,
पा कोमल स्पर्श तुम्हारा
क्षण भर को गुलजार हुई मैं।
माँ मुझको इस बार बचा ले
ममता का संसार रचा ले,
चलूँ पकड़ ऊँगली माँ तेरी
आशीष यही मुझको अपना दे।
जन्म मुझे चाहे जितना दे।

चाहूँ न घर -बार तुम्हारा
बस ममता की अविरल धारा,
अपनी इन प्यारी आँखों से
देखूँ धरती, अम्बर सारा।
पापा बूढ़े हो जाएँगे
रातों को जब सो जाएँगे,
सहलाऊँ मैं उनके सर को
प्यारा-सा मुझको अंगना दे।
जन्म मुझे चाहे जितना दे।

अनिल मिश्र प्रहरी।



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1 More responses

  • Divya Raj kumar
    Divya Raj kumar (Registered Member)
    Commented on 09-November-2019

    Satya likha h apne
    Us bachchi ki khwaishon ko.....

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