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बेवफाई

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19 -Mar-2021 DIPAK KUMAR Sad Poems 0 Comments  27 Views
बेवफाई

दो चार क़दम चलते है यहाँ, फिर राहों में खो जाते है
कहते हैं हम अपना जिसको, अक्सर वो दगा दे जाते है
दो चार क़दम चलते यहाँ———————–

हम जिसके लिए, सपनो को संजोये सपनो में खो जाते है
मंज़िल की तरफ चलते -चलते, चेहरे धुंधले हो जाते है
दो चार क़दम चलते है यहाँ———————-

तनहा रहकर चलना लेकिन, उम्मीद यहाँ पर मत करना
पी लेना ज़हर मर जाना पर , इश्क़ के आग में मत जलना
घर जिसका बनआगे दिल में, अक्सर वो घर को जलाते है
दो चार क़दम चलते है यहाँ———————-

जब दिल टूटा तब जाना ये , आसान नहीं ग़म को सहना
आसान यहाँ दिल को देना , मुश्किल है दिल में बने रहना
इश्क़ के तुफानो में अक्सर, आशिक़ के दिए बुझ जाते है
दो चार क़दम चलते है यहाँ—————————-

बेवफाई


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